कैसे होने दूँ मैं?

गिरा था मैं कपकपाते हुए जब
हाथ उसी ने बस बढ़ाया था मुझ तक तब
उसकी खुशियों को मैं खोने कैसे दूँ?

डरा था मैं खुद की वीरान तन्हाइयों से जब
पायल बस उसी ने बजायी थी यूँ तब
अकेले उसको मैं गम यूँ सहने कैसे दूँ?

हार के इस जहां से माँगा था ज़हर मैंने
दवा मेरे हाँथों मैं उसी ने थमाई थी यूँ तब
दीदार को उसके खुदा को मैं पुकार कैसे ना दूँ?

भटकता रहा तेरे वजूद को ढूंढ़ता हुआ मैं
आके यूँ उसने दिया तेरे होने का सबूत मुझे तब
तुझसे पहले उसे इबादत कैसे ना दूँ मैं?

U-Can

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