आहट…

दिलो दीवारों की वीरानियों से इश्क़ कर ही बैठे थे हम कि
कोई आहट सी आयी लगा जैसे किसी ने कुण्डी बजायी है

मीलों दूर तक सन्नाटा हुआ करता था कभी
आज अक्स को क्या छुआ है उनके दिलो में महफिलें उमड़ आयी हैं

खेल तो देखो उस किस्मत का यारों
शमा जलाई थी ये सोचकर की राख होजाएंगे इस रोज़
और आज ही फलक से बिजली कड़कड़ाई है

U-Can

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