नाज़ है खुदपे

लोग यूहीं मुकद्दर को दिलो में पनाह देते हैं
मैंने प्यादों को शतरंज में जीतते देखा है
शहंशाओं को तक़दीर को कोसते देखा है
खुद की हिम्मत पर प्यादों को गुरुर करते देखा है

मुक्कमल जहान मिले उनको भी जो बैठे हैं खुदा की रेहमत के लिए
सिकंदरों को कई दफा मैंने खुद की एहमियत को आईने में निहारते देखा है

U-Can

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