विवाह में त्रिबल शुद्धि

युवक-युवती का विवाह किस दिन होना चाहिए? ऐसा शुभ दिन, मुहरत निकालने के लिए त्रिबल शुद्धि देखी जाती है। वर की जन्मराशि से सूर्य और चंद्र बल, तथा वधू की जन्मराशि से गुरु व चंद्र बल देखा जाता है। इसे त्रिबल शुद्धि कहते हैं।

वर की राशि से सूर्य तीसरा, छटवा, दसवा और ग्यारवा श्रेष्ठ, प्रथम, द्वितीय, त्रितीय हो तो पूज्य तथा ४,८,१२ नेष्ट होता है। लेकिन सूर्य उच्च राशि में मेष में हो तो ४,८,१२ में भी विवाह हो सकता है। कन्या की राशि से गुरु दूसरा, पांचवा, सातवा, नौंवा, ग्यारवा हो तो श्रेष्ट होता है। प्रथम, त्रितीय और दशम पूज्य होता है तथा ४,८,१२ नेष्ट होता है। परन्तु गुरु स्वग्रही या उच्च हो तो नेष्ट गुरु में भी विवाह किया जा सकता है। वर और कन्या दोनों के लिए, राशियों से चन्द्रमा १,२,३,५,६,७,९,११ श्रेष्ठ, ४,८,१२ नेष्ट। वर को १२वा मध्यम व कन्या को १२वा चन्द्रमा नेष्ट होता है।

विवाह मुहरत मूल, अनुराधा, मृगशिरी, रेवती, हस्त, तीनो उत्तरा, स्वाती, मधा, और रोहिणी नक्षत्र एवं ज्येष्ठ, माघ, फाल्गुन, मार्गशीर्ष और आषाढ़ मास में विवाह शुभ होता है। इसके अलावा कार्तिक शु. एकादशी, माघ शु. पंचमी, बसंत पंचमी, फाल्गुन शु. द्वितीया अर्थात फुलेरा द्वितीया, वैशाख शु. त्रितीया – अक्षय त्रितीय, आषाढ़ शु. भादुली नवमी आदि स्वयं सिद्ध मुहरत माने गए हैं

यदि वर को सूर्य पूज्य हो और कन्या को गुरु श्रेष्ठ हो अथवा कन्या के लिए गुरु पूज्य हो एवं वर के लिए सूर्य श्रेष्ठ हो तो पूजा वाला मुहरत होता है। यदि वर वधु के लिए (दोनों) सूर्य और गुरु पूज्य हो तो विशेष परिस्तिथियों को छोड़कर मुहरत त्याग करना चाहिए। विवाह से पूर्व पूज्य गृह सूर्य अथवा गुरु की पूजा करवा लेनी चाहिए। यथा संभव इन ग्रहों की शांति हवन के साथ करवानी चाहिए।

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