ज़िन्दगी

एक ही जिस्म में सौ इंसान समाये हैं
एकमत नहीं हैं, सब के सब अपनी ही धुन पे सवार हैं
एक ख़ौफ़ज़दा है
तो एक इन्किलाबी है
एक आशिक़ है
तो एक फरेबी है
एक ख्वाहिशमंद तो एक कामचोर है
एक दुरुस्त है तो एक कमज़ोर है
एक वर्त्तमान में मशगूल है तो एक अतीत में अटका है
एक खुदा को मानता नहीं और एक अन्धविश्वास की सूली पे लटका है
एक दीवाना है तो एक बस फ़साना है
एक घर पे है तो एक बेठिकाना है
एक चुप होता नहीं और एक खामोश है
एक गुनहगार है तो एक निर्दोष है
एक रूह है तो एक सिर्फ जिस्म है
एक अनोखा है तो एक हज़ार किस्म है
एक बचकाना है तो एक कामिल है
एक जुदा है दुनिया से तो एक महफ़िलो में शामिल है
एक खुद की कीमत से नावाकिफ है तो एक गुरूर में चूर रहता है
एक ने दुनिया की बुनियादी हकीकतो से समझौता कर लिया तो एक अभी भी इस से दूर रहता है
एक सच्चा है तो एक झूठा है
एक मुकम्मल है तो एक सौ बार टूटा है
एक सुकून है तो एक शोर है
एक कुछ और तो एक कुछ और है
किस को कब छुपाना है, किस को दुनिया के रूबरू कराना है
इस मुसलसल नाकामयाब कोशिश का नाम हमने ज़िन्दगी रख दिया है

Source- https://www.facebook.com/satyavrit

U-Can

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