कुछ तो गलत है यहाँ

लोग अक्सर नाम में मज़हब ढूंढ लेते हैं
दुआएं किसे देनी है और किसे नहीं
पल भर में तय कर लेते हैं
ना जाने क्यों पर
कुछ तो गलत है यहाँ

मुझसे क्यों अमीर वो, ये सोच के इंसान खफा है
ले जाती ये उलझन उसे खुदा के पास कई दफा है
दूसरी ओर
दो वक़्त की रोटी नसीब नहीं उसको
पता नहीं फिर भी वो क्यों मुस्कुरा रहा है
कुछ तो है उसके पास
जो खुदा भी नहीं दिला पा रहा है
ना जाने क्यों पर
कुछ तो गलत है यहाँ

ऊँगली पकड़ के जिसकी जीता सारा जहाँ तूने
किसी अनजान का हाथ थामे सड़क पार करता है वो
कभी तो लौटेगा तू ये सोच के
आज भी तेरा इंतज़ार करता है वो

किताबें बहुत है पढ़ी तूने पर जीना नहीं आया
उड़ना तो सीख लिआ पर अपनों के लिए ठहरना नहीं आया
इतना पाके भी कुछ है कहा पास तेरे
जब एक जरूररतमंद को तुझे कुछ देना नहीं आया

दीदार कर इस अनोखी दुनिया का
उठ अभी वरना कही समय ना बीत ले
मंगल पर कदम रखने के ख्वाब देखता है तू
पहले धरती पर रहना तो सीख ले

ना जाने क्यों पर
कुछ तो गलत है यहाँ

U-Can

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.